LAW'S VERDICT

चलती ट्रेन में इंस्पेक्टर ने की छेड़छाड़, विरोध करने पर युवती पर NDPS केस!


आरोप पर हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, IG को 2 हफ्ते में जांच रिपोर्ट देने के आदेश

जबलपुर। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में एक जमानत अर्जी की सुनवाई के दौरान चौंकाने वाले आरोप सामने आए। जबलपुर की एक युवती ने दावा किया कि चलती ट्रेन में क्राइम ब्रांच के पुलिस इंस्पेक्टर और उसके साथी ने उसके साथ छेड़छाड़ की और विरोध करने पर उसे एनडीपीएस के फर्जी मामले में फंसा दिया गया। मामले को गंभीर मानते हुए जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकलपीठ ने जबलपुर रेंज के आईजी को पूरे प्रकरण की जांच कर दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने युवती की जमानत याचिका फिलहाल खारिज कर दी।

क्या है पूरा मामला?

11 जनवरी 2026 को जबलपुर के मदनमहल थाना पुलिस ने लिंक रोड पर एक युवती को करीब सवा 12 किलो गांजा के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया। इसी मामले में युवती ने जमानत अर्जी दायर की। सुनवाई के दौरान युवती के अधिवक्ताओं सौरभ कुमार शर्मा और विकास कुमार सन्टू ने कोर्ट में कहा कि पुलिस की कहानी सही नहीं है। युवती रायपुर से जबलपुर ट्रेन से आ रही थी, उसी दौरान क्राइम ब्रांच के एक पुलिस अधिकारी व अन्य पुलिस कर्मियों ने उसके साथ छेड़छाड़ की। विरोध करने पर उसे जबरन थाने ले जाकर फर्जी एनडीपीएस प्रकरण दर्ज कर दिया गया।

हाईकोर्ट ने तलब किए CCTV फुटेज

युवती के आरोपों को हल्के में न लेते हुए हाईकोर्ट ने नैनपुर और मदनमहल रेलवे स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज तलब किए। मदनमहल थाना प्रभारी धीरज रॉय द्वारा पेन ड्राइव में प्रस्तुत फुटेज की कॉपी अदालत ने युवती और सरकारी पक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

फर्जी ID से होटल में रुकी थी युवती 

राज्य की ओर से शासकीय अधिवक्ता रामजी पाण्डेय ने तर्क दिया कि युवती रायपुर में अपने एक मित्र के साथ फर्जी आईडी से होटल में ठहरी थी। केवल गिरफ्तारी स्थल को लेकर विवाद के आधार पर इतने गंभीर एनडीपीएस मामले में जमानत नहीं दी जा सकती।

कोर्ट ने पाए विरोधाभास, कहा- जांच जरूरी 

अदालत ने पाया कि पूरे मामले में कई गंभीर विरोधाभास सामने आ रहे हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि मामले की ईजी स्तर पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच कराई जाए। जांच में युवती और संबंधित पुलिस अधिकारी की मोबाइल लोकेशन का परीक्षण किया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि झूठा फंसाने के आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला अत्यंत गंभीर होगा। अब दो सप्ताह बाद आने वाली आईजी की रिपोर्ट पर इस सनसनीखेज प्रकरण की दिशा तय होगी।

हाईकोर्ट का आदेश देखें  MCRC-4158-2026

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